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कबीरदास की जयंत धूमधाम से मनायी गयी

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 9 जून, समूचे विश्व को कौमी एकता का संदेश देने वाले महान संत कबीरदास को उनकी जयंती पर याद किया गया। वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति की ओर से कलक्ट्रेट परिसर में अयोजित गोष्ठी मंे मुख्य अतिथि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त सेवानिवृत्त प्रधानाचार्या डा. कमलेश पांडे ने कहा कि संत कबीर मानव धर्म के सच्चे उपासक थे।
मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण होता है। चैरासी लाख योनियों में मानव योनि को सबसे उत्तम माना गया है, क्योंकि इस योनि में जीव के पास बुद्धि और विवेक होता है जो दूसरी योनियों में नहीं होता।
मानव योनि में जीव को यह मौका मिलता है कि वह अपने इहलोक और परलोक दोनों को सुधार सके। कबीर दास जी कहते हैं कि मानव जीवन पाकर जीव को इसे ईश्वर की भक्ति और उनके द्वारा बताए शुभ कार्यों में लगाना चाहिए। इस प्रकार पेड़ से पत्ता एक बार गिर जाता है तो दोबारा वह पेड़ में नहीं लग सकता, उसी प्रकार यह मानव जीवन दोबारा प्राप्त करना अत्यंत दुष्कर है, अतः उसे सार्थक करने का प्रयत्न करना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे एडवोकेट श्याम प्रकाश शर्मा ने कहा कि धार्मिक सहिष्णुता और मानवता को अपनाकर कबीर ने साम्प्रदायिक सौहार्द कायम करने पर जोर दिया है। वह कहते हैं कि मैं न तो हिन्दू हूं और न ही मुसलमान हूं। मेरा शरीर तो पांच तत्वों (धरती, जल, आग, आकाश और वायु) से मिल कर बना है और बाद में उसी में मिल जाना है।
सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कबीर के जीवन वृत्त पर चर्चा करते हुये कहा कि कबीर ने बाह्य आडम्बर पर कभी विश्वास नही किया। इसके लिये वे हिन्दू मुसलमानों को फटकारते रहे। संचालन कर रहे राष्ट्रीय कवि डा. रामकृष्ण लाल जगमग ने कबीर को महान सुधारक बताते हुये कि उनके उपदेश वर्तमान में समाज के लिये ज्यादा प्रासंगिक हैं। इस अवसर पर पण्डित चन्द्रबली मिश्र, शब्बीर, दीनानाथ, महेन्द्र, जगदीश प्रसाद, आशुतोष नरायन मिश्रा आदि उपस्थित थे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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