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आजादी की लड़ाई में अहम्भूमिका निभाने वाला शोहरतगढ़ क्षेत्र प्रगति की दौर में पिछड़ गया

VICHAR PARAK AD

आलोक कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
सिद्धार्थनगर 17 अप्रैल, आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों का छक्का झुड़ालेने वाले स्वतन्त्रता संग्राम के महान ज्ञात-अज्ञात शूर वीरों का क्षेत्र शोहरतगढ़ आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाने में बहुत आगे रहा। लेकिन आजादी मिलने के बाद इस क्षेत्र की वह प्रगति नहीं हो पायी जो होना चाहिए था। स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों का यह क्षेत्र आज भी नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
इस क्षेत्र की प्रमुख समस्या प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़, अच्छी सड़कों का अभाव, क्षेत्र में उच्च शिक्षा तथा तकनीकी शिक्षा संस्थाओं की कमी, सिंचाई के साधनों की कमी के साथ ही साथ स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतद कमी इस क्षेत्र की प्रमुख समस्यायंे है।
आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाला शोहरतगढ़ क्षेत्र का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। आजादी की लड़ाई के दौरान शोहरतगढ़ का कांग्रेस कार्यालय जला दिया गया था और स्वतन्त्रता संग्राम के नायक रहे पं0 परमेश्वर दत्त को कोणों से पीट-पीट कर बेहोश कर दिया गया था। समाज सेवियों और जनता पर अंग्रेजों ने घोड़े दौड़ा कर आजादी की लड़ाई को कुचलने का प्रयास किया गया था। अमर शहीद बुद्धई ने हंस-हंस कर अपने प्राणों की बाजी लगा दिया था।
उनका बलिदान सदैव लोगों को देश की एकता का प्रेरणा देता रहेगा। 25 अप्रैल 1922 को शोहरतगढ़ में अंग्रेज पुलिस द्वारा आजादी के दीवानों पर अमानवीय ढंग से जुल्म किये और जुल्म का तांण्डव लगभग एक सप्ताह तक चलता रहा।
शोहरतगढ़ में 25 अप्रैल, 1922 की पुलिस ने कांग्रेस कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर अमानवीय ढंग से जुल्म किये और कई सप्ताह तक आतंक छाया रहा।
29 अप्रैल को चिल्हिया थाने के सब इन्सपेक्टर कांग्रेस कार्यालय में 30 कांस्टेबुलों के साथ आये और वहां की सब चीजे उठा ले गये। कार्यालय एक झोपड़ी में था जिसे उसने गिरवा दिया। झोपड़ी को खींच उठा ले गये। झोपड़ी को खींच कर कुछ दूर लाकर जला दिया गया। इसके बाद पुलिस कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर टूट पड़ी और खूब पिटाई की।
वहां के एक प्रमुख कार्यकर्ता परमेश्वर दत्त के यह कहने पर कि कार्यकर्ता पुलिस वालों से माफी मांग कर छुटकारा न ले, पुलिस सब इन्सपेक्टर परमेश्वर दत्त पर टूट पड़ा और उन्हें खूब पीटा। पुलिस और चैकीदारों ने भी इसमें भाग लिया। पं0 परमेश्वर दत्त चुपचाप पिटते रहे। परमेश्वर दत्त ने लोगों को बदला न लेने के लिये कहा। थोड़ी देर बाद ये बेहोश हो गये। दो अन्य व्यक्ति भी इसी प्रकार पीटे गये। इनमें एक बेहोश हो गये आदमी को आग में झोकने का प्रयास किया गया पर अन्य लोगों के दखल देने के कारण ऐसा न हो सका। पीटे गये लोगों में से एक व्यक्ति बुधई की दूसरे दिन मृत्यु हो गयी। पुलिस के कड़े रूख के बावजूद सभी कांग्रेसी कार्यकर्ता पूर्णतया अहिंसक एवं शांत रहे। सारा टाउन पुलिस के दबदबे से भयाक्रांत था।
आजादी की लड़ाई में यमुना शुक्ल निवासी ग्राम बोहली को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान दो माह तक नजरबन्द रखा गया था, अब्दुल कयूम उर्फ अब्दुल मोकरिम निवासी दुधवनिया, 22 मार्च 1942 से 1943 तक जेल में नजर बन्द रहे, कोतवाल सिंह निवासी कोटिया को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 अगस्त 1942 से 31 जुलाई 1944 तक नजर बन्द रखा गया। कोदई मिश्र निवासी ग्राम अगया मिश्र को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 28 अगस्त 1942 से 19 नवम्बर 1943 तक जेल में बन्द रखा गया।
गुदड़ीराम निवासी शोहरतगढ़ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 22 अगस्त से 30 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया और 1942 में दो दिन कारावास तथा 150 रूपये की सजा प्रदान की गयी। गुलाब दत्त निवासी ग्राम कड़जहवा को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 4 सितम्बर 1942 से 1 फरवरी 1943 तक जेल में बन्द रखा गया। झिन्नू सिंह निवासी रमवापुर को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 15 अगस्त 1942 से 1 फरवरी 1943 तक जेल में बन्द रखा गया। घिसियावन निवासी ग्राम तेतरी को 2 सितम्बर 1942 से 30 मार्च 1943 तक जेल में बन्द रखा गया। घुरहू निवासी ग्राम बैरखी उर्फ काजीजोत को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 29 अगस्त 1942 से 21 अक्टूबर 1942 तक जेल में रखा गया, 1943 में भी वे 48 दिन नजरबन्द थे, गजलाल निवासी बिरहाना को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 15 सितम्बर 1942 से 12 जून 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, झब्बर निवासी ग्राम छितौना को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 14 सितम्बर 1942 से 30 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, त्रिवेदी उर्फ हुब्बा निवासी ग्राम छतहरी को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 15 सितम्बर 1942 से 11 जून 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, देवकली प्रसाद निवासी ग्राम डेकहरी खुर्द को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1932 में 6 माह की सजा तथा 100 रूपया का जुर्माना, तथा 1941 में एक माह की कारावास की सजा और 15 रूपया का जुर्माना की सजा दी गयी। देवी प्रसाद निवासी शोहरतगढ़ को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान 1941 में पहली बार 15 दिन और दूसरी बार 6 माह की कड़ी कैद और 10 रूपया जुर्माना की सजा प्रदान की गयी, नवनाथ निवासी ग्राम शोहरतगढ़ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 22 अगस्त 1942 से 3 नवम्बर 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, पटेश्वरी निवासी ग्राम ढेकहरी को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 21 अगस्त 1942 से 21 मई 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, बंदे निवासी ग्राम मुड़ली को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 6 सितम्बर 1942 से 21 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, बुद्धि सागर निवासी ग्राम मलगवा को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 अगस्त 1942 से 15 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, बेनीमाधव निवासी ग्राम इमिलिया को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 अगस्त 1942 से 19 नवम्बर 1943 तक जेल में बन्द रखा गया और 1941 में कचेहरी उठने तक की सजा दी गयी थी, बैकुन्ठ निवासी ग्राम निबाव को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 10 सितम्बर 1942 से 30 सितम्बर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, ब्रजमोहन निवासी ग्राम चिल्हिया को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 मे 9 मास की सजा दी गयी, भागमल निवासी ग्राम मुडि़ला को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 16 फरवरी 1943 से 10 नवम्बर 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, मतई निवासी ग्राम सकरौरा को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में 29 जुलाई से 19 दिसम्बर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, मनोहर निवासी ग्राम छतहरी को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 अगस्त 1942 से 24 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, देव प्रसाद निवासी ग्राम खैरा को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 31 अगस्त 1942 से 8 जून 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, मुक्ति प्रसाद निवासी ग्राम विशुनपु को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण 1941 में 6 माह की सजा और 20 रूपये जुर्माना, मो0 इस्माइल निवासी ग्राम शोहरतगढ़ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 जुलाई 1942 से 27 नवम्बर 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, रतन निवासी ग्राम नियांव को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 7 सितम्बर 1942 से 23 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, रामनाथ लोहार निवासी ग्राम शोहरतगढ़ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में 3 मास तक जेल में बन्द रखा गया, रामबरन निवासी ग्राम जुड़ी़कुइया को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान 1941 में 6 माह कैद की सजा , तथा भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 2 माह तक की कैद की सजा, राम बिलास गुप्ता निवासी ग्राम ढेबरूआ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 10 अगस्त 1942 से 11 जनवरी 1945 तक जेल में बन्द रखा गया, राम लखन मिश्र मुखतार निवासी ग्राम गोविन्दपुर को व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन के दौरान 1941 में 2 मास की सजा और 50 रूपया का जुर्माना, रूपई निवासी ग्राम धोबहा को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 18 सितम्बर 1942 से 14 जून 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, शिवनाथ निवासी ग्राम शोहरतगढ़ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 1942 में दो माह तक जेल में बन्द रखा गया, सतनारायन मारवाणी निवासी ग्राम शोहरतगढ़ को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 19 अगस्त 1942 से 30 सितम्बर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, साबिर निवासी ग्राम परसिया को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 2 अक्टूबर 1942 से 16 अगस्त 1944 तक जेल में बन्द रखा गया, सुखदेव निवासी ग्राम छतहरी को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 अगस्त 1942 से 18 मई 1943 तक जेल में बन्द रखा गया, सुखुआ निवासी ग्राम मुड़ली को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 6 सितम्बर 1942 से 21 अक्टूबर 1942 तक जेल में बन्द रखा गया, इसके अलावा इस क्षेत्र के अनेक स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी जिनका नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाया है ने भी आजादी की लड़ाई मेें अहम्भूमिका निभाया था।
ऐसी सभी महान स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों के इस पवित्र धरती शोहरतगढ़ क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़े जाने की जरूरत है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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