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आओ संवाद और स्वीकार की नींव पर राममन्दिर बनाएं-मोरारी बापू

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
अयोध्या 30 दिसम्बर, धर्मनगरी के बड़ा भक्तमाल की बगिया रामघाट में चल रही नव दिवसीय श्रीरामकथा के अन्तिम दिवस अन्तर्राष्ट्रीय कथाव्यास मोरारी बापू ने कहाकि इस अयोध्या की पावन भूमि पर मानस गणिका की कथा ने जो शब्द प्रस्तुत किया है। उससे तो अब यही समझता हूं कि जब भी भविष्य में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मन्दिर निर्माण का कार्य प्रारम्भ होगा। तो उसकी बुनियाद अयोध्यानगरी में हुई यह मानस गणिका की कथा ही होगी। इसका मुझे पूर्ण विश्वास है। पीएम मोदी समेत पूूूरे देश को मैं इस व्यासपीठ से आवाज दे रहा हूं कि आओ संवाद और स्वीकार की नींव पर राममन्दिर बनाएं। हमें सिर्फ वहां दो ही ईंट रखना है एक संवाद की व दूसरी स्वीकार की।
लेकिन यह ईंट खण्डित न होने पाए। उन्होंने कहाकि राममन्दिर निर्माण के लिए संत समाज तो शुरू से ही लगा है। सब मिलकर संवाद और स्वीकार की नींव पर ध्वजा फैला दें। भगवान राम का मन्दिर विश्व का मन्दिर है। आओ संवाद व स्वीकार नाम की दो ईंट रखकर विश्व मन्दिर बनाएं। मोरारी बापू ने कहाकि आज मैं बहुत प्रसन्न हूं, ज्यादा प्रसन्न हूं। अब यह तय है मुझे कोई गम सताने वाला नही है। अयोध्या में इतने सुख के बाद १४ साल की यह पीड़ा है। इस प्रकार का क्रम तो चलता ही रहता है।
अयोध्यावासी सुख और दुख दोनों में झूले हैं। जहां सब सुख है कोई दुख नही है। ऐसी अगर कोई भूमि है तो वह चित्रकूट ही है। अयोध्या में बड़ी विपत्ति है। हमेशा से संघर्षरत रही है यह भूमि। सुन्दर, चैत्विक अवस्था चित्रकूट है। ब्रहमा की यह भूमि गुण-अवगुण मिश्रित है। लेकिन चित्रकूट इस भूमि का टुकड़ा नही भूमिका है। मिथिला में सुख ही सुख था। मिथिलानगरी में पिंगला नाम की एक गणिका रहती थी। वह हमेशा लोगों के इंतजार में कोठे पर सज-धजकर बैठी रहती थी। लोग उसे देखकर जाते थे।
वह उनकी प्रतीक्षा में बैठी रहती थी। तब उसे एक दिन वैराग्य आया। उसने सोचा कि इन लोगों की प्रतीक्षा में कई घण्टों बैठी रहती हूं। क्यों न यह समय परमात्मा की भक्ति में लगाया जाए। बापू ने कहाकि यह परमात्मा कुछ उजाड़ करते हैं। मेरा एक वाक्य आप लोग भविष्य में हमेशा याद रखना- हे परमात्मा इन लोगों को माफ करना देना। क्योंकि यह जानते हैं कि व्यासपीठ क्या कर रही है।
सब परमात्मा की केवल कृपा है। मुझे तो इतना आनन्द और खुशी है कि गणिकाओं के सहयोग में इतना बड़ा काम हो गया। आज हमारे दादा की समाधि प्रसिद्ध हो गई। उपाधि वाले नही बल्कि समाधि वाले राजी रहते हैं। मुझे खुशी है आप सब इतने भाव के साथ कथा में आए। आज यह नौवें दिन की कथा इन गणिकाओं बहन-बेटियों को समर्पित है। बाप के घर यह बहन-बेटियां कभी भी मिलने आ सकती हैं। बशर्ते जब बाप हाजिर रहे। जिसको परमात्मा पकड़ता है उसको कोई नही पकड़ सकता। उन्होंने कहाकि इस मोक्षदायिनी नगरी की चेतनाओं को प्रणाम करते हुए। बहुत सी संस्थाएं आगे आयीं इन गणिकाओं बहन-बेटियों की मदद में। हम हाथ पसारे खड़े हैं कि आप सब आगे आओ इनकी मदद के लिए। जामनगर का हमारा आश्रम इन बहन-बेटियों के लिए हमेशा खुला है। हर दिन शाम के समय हमें जो चिट्ठियां मिलती थी। उसमें बहुत सा सकारात्मक परिणाम मिला। कथा केवल वचनात्मक नही, रचनात्मक भी रहनी चाहिए। आप सबने इन गणिकाओं बहन-बेटियों की मदद में बहुत सम्मानीय धनराशि एकत्र की। ६ करोड़ ४७ हजार रूपये मदद की यह राशि पूरी देश-दुनिया से आयी है। एक निश्चित समय में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी यह तनुजा सेवा दी। यह इकट्ठी राशि कहां-कहां दी जाए सेवा में। उसका पूरा खाका बना लिया गया है। आपका एक-एक पैसा इन गणिकाओं बहन-बेटियों के सहयोग में पहुंचेगा। मैं भी चाहता हूं कि आपका प्रेम पूर्वक दिया गया दान ठोस कार्य में लगे। व्यासपीठ से जुड़े लोग कोई नाम के आकांक्षी नही हैं। यह गंग धार रूकनी नही चाहिए। सदैव यह चलती रहे।
अन्तर्राष्ट्रीय कथाव्यास ने कहाकि मानस गणिका कथा के इस पावन अवसर पर आज कन्या की विदाई है। इसके माध्यम से उनकी भावना है कि मुझको और अब चाहिए क्या, मैं तो अयोध्यामय हो गई। कोशिश कर रहा हूं इनका मनोभाव कागज पर उतारने की। रामचरित मानस समेत सभी ने इनका स्वीकार किया है। यहां तक कि तुलसीदास रामचरित मानस के समापन में गणिका का उल्लेख करते हैं। इस ईश्वर प्रेमिक जीव संकल्प यज्ञ में। सभी ने अपनी-अपनी रीति और पद्धति से इन गणिकाओं बहन-बेटियों को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहाकि मुझे सेना, लश्कर, आर्मी आदि कुछ शब्द ऐसे हैं जो प्रिय नही। मैं दीवाना हूं, लेकिन मेरे आंसुओ पर मत जाना। गुरू कृपा से सेना, लश्कर, आर्मी आदि संगठन ऐसे सब काम करते हैं। लेकिन इतना आनन्द जो शिव सेवा से होता है उतना और कहीं नही। यह मेरी शिव सेवा है। प्रभु की कृपा की भयो सब काजू, जनम हमार सुफल भयो आजू।। यह काम मोरारी बापू नही सिर्फ राम ही कर सकते हैं। इस कलयुग में हम किसी का स्मरण नही कर पाते। लेकिन हम राम को गाएं, राम को सुनें। राम ही हम सभी का उद्धार करेंगे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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