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अपहरण की घटना नाटक निकला-वीरेन्द्र यादव

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(विचारपरकर प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 2 फरवरी, जिले के महरीखावां मोहल्ले से अपहरण की घटना मात्र नाटकीय निकला। अपर पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र यादव ने आज यहा पत्रकारो से बात-चीत में बताया है किः30 जनवरी .2016 को महेन्द्र पुत्र बलिराम मूल निवासी परासडीह थाना गौर वर्तमान निवास स्थान मोहल्ला महरीखाॅवा द्वारा पुलिस अधीक्षक बस्ती को सूचना दिया कि उसके भाई प्रिंन्स पुत्र बलिराम उम्र लगभग 12 वर्ष जो चन्द्रशेखर आजाद स्कूल में छटवी कक्षा का छात्र. है को दिनाकंः29.01.2016 को दिन में समय 2ः30 बजे काली स्कार्पियों सवार 5 अज्ञात अपहरण कर्ताओं द्वारा मोहल्ला महरीखाॅवा से उसके घर के नीचे से नशीला पदार्थ सूंघाकर बेहोश कर अपहृत कर लिया गया। शिकायत के अनुसार अपहृत बच्चा प्रिन्स गोण्डा रेलवे स्टेशन पर अपहरण कर्ताओ के चंगूल से भागकर अपने
परिजनो को दूरभाष से घटना की सूचना सायं 5-30 बजे मोबाईल नं0 8601725292 पर दिया। जो अपहृत के परिजनो के अनुसार अपहृत बच्चे को रात्रि में ही घर लाया गया लेकिन स्थानी पुलिस कोतवाली अथवा जनपद के किसी पुलिस अधिकारी को उक्त घटना की सूचना नही दी गयी।
उन्होने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए तत्काल शिकायत कर्ता के शिकायत के अनुसार घटना के अनावरण के लिये प्रभारी निरीक्षक कोतवाली सच्चिदानन्द त्रिपाठी को तथा स्वाट टीम
प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह को उनकी टीम के साथ लगाया गया। इसके लिये इलेक्ट्रानिक संसाधनो का भी उपयोग कर घटना को अनावरित किया गया। उक्त तथाकथित अपहरण का वास्तविक तथ्य जो प्रकाश में आया कि तथाकथित अपहृत प्रिन्स कुमार पुत्र बलिराम कक्षा 5 तक की पढ़ाई गाॅव मंे प्राथमिक पाठशाला परासडीह में किया। इसके भाई और परिजना बस्ती शहर के महरीखाॅवा कस्बे में रहते है और व्यवसाय करते है। इनकी कपड़े की दुकान है। प्रिन्स की शिक्षा के लिये परिजनो ने इसका दाखिला 6वी कक्षा में चन्द्रशेखर आजाद स्कूल में करा दिया। स्कूल में कोचिन की भी व्यवस्था थी । लेकिन इसका मन पढ़ने में नही लग रहा था और वह अपने परिजनो के साथ महरीखाॅवा में न रहकर अपनी माॅ के साथ रहना चाहता था दि0 29.01.2016 को प्रत्येक दिन के भाॅति 2ः30 स्कूल से
आया और स्कूल ड्रेस में ही घर में स्कूल बैग रखकर मोहल्ले के बाहर थ्रीव्हीलर (टेैम्पो) में बैठकर रेलवे स्टैशन गया और अमरनाथ एक्सप्रेस पर बैठ गया। मार्ग में उसका मन परिवर्तित हुआ और गोण्डा स्टेशन पर उतर गया। घर और परिजनो के आक्रोश से बचने के लिये उसने अपहरण की उपन्यासिक कहानी बनाई।
प्रभारी निरीक्षक सच्चिदानन्द त्रिपाठी द्वारा बच्चे को बड़े ही मनोवैज्ञानिक तरीके से बातचीत करकेे वास्तविक तथ्य को निकाला गया तथा इस कार्य में स्वाट टीम प्रभारी द्वारा
तकनीकी संसाधनो से भी सहयोग प्रदान करके इस तथाकथित अपहरण की घटना का अनावरण किया गया। इस सराहनीय कार्य हेतु पुलिस अधीक्षक बस्ती द्वारा 5000रू0 के पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा रहा है।

उन्होने बताया कि ठीक इसी प्रकार दूसरी घटना दिनांकः30.01.2016 को कुदरहा बाजार थाना क्षेत्र लालगंज से चन्दन पुत्र रामपरवेश जो शिवा मांटेशरी स्कूल में कक्षा 7 वी का छात्र है तथा मूल निवासी टेन्गरिय राजा थाना कलवारी बस्ती का है, के तथाकथित अपहरण का प्रकरण प्रकाश में आया। जिसमें चन्दन उपरोक्त को 2 अज्ञात व्यक्तियों द्वारा कुदरहाबाजार में सदरूद्दीन अंसारी की दुकान पर ज बवह अपना मोबाईन रिचार्ज कराने जा रहा था तो अपहृत कर लिया गया और उसे आर0के0बी0के0 पेट्रोल पम्प से उसके परिजन उसे ले गये। पुलिस को इस प्रकरण जानकारी दी गयी जिस थानाध्यक्ष कलवारी तथा क्षेत्राधिकारी कलवारी और स्वाट टीम के संयुक्त प्रयास से इस प्रकरण का भी अनावरण हुआ हैं। जिसके लिये पुलिस अधीक्षक बस्ती द्वारा थानाध्यक्ष कलवारी और स्वाट टीम प्रभारी को 5000रू0 के नगद पुरस्कार से पुरस्कृत किया जा रहा है।
तथाकथित अपहृत चन्दन पुत्र रामपरवेश ने बताया कि 30.जनवरी .2016 को समय 01ः30 बजें कुदरहा बाजार से घूमने के लिये आटो से बस्ती आया था बस्ती शहर में आकर भटक गया
उसे समझ में नही आ रहा था कि वह किधर जाये तब उसे परिजनो की याद आयी और अपने परिजनो के आक्रोश से बचने के लिये उसने अपहरण की झूठी कहानी बनायी। मनोवैज्ञानिक तरीको से
बातचीत करने पर चन्दन उपरोक्त ने सत्य घटना क्रम बताया। एैसा प्रतीत होता है कि अभिभावकगण द्वारा अपने बच्चो को पर्याप्त समय नही दिया गया जिसके कारण बच्चांे में अवसाद , कुण्ठा घर कर गयी और औपन्यासिक कल्पनाऐं बनी जिसके कारण उक्त घटना घटित हुई । चुंकी ये बच्चे बहोत ही कम उम्र के है अतः इनको मनोवैज्ञानिक तरीके से उक्त प्रकार की कल्पित घटना की पुनरावृत्ति न करने को बताया गया है। आज आवश्यकता है बच्चो को प्रेरणादायक, साहसिक तथा सम्वेदनशील वातावरण देने की जिससे प्रिन्स और चन्दन की तरह कपोलकल्पित घटनाओ से जनमानस में असुरक्षा की भावना न बने।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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