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अनुष्ठान व अनुशीलन करने से जीवन में निखार आता है-आचार्य राजीव रूप

(विचारपरक प्रतिनिधि द्वारा)
बस्ती 4 नवम्बर, आर्य समाज नई बाजार बस्ती के 45वें वार्षिकोत्सव में चल रहे वेद कथा अमृतवर्षा के तृतीय दिवस के वैदिक यज्ञ में ओम प्रकाश आर्य, घनश्याम आर्य, योगेश दुआ सपत्नीक मुख्य यजमान एवं सुभाष चन्द्र आर्य, छोटे लाल यादव, ज्योति, माधुरी, बीना वर्मा, रिया पाण्डेय, डा0 वीरेन्द्र त्रिपाठी एवं सुभाष शुक्ल सहायक यजमान बनकर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशेष वेदमंत्रों से आहुतियाॅ देते हुए आम जनमानस को पर्यावरण शोधक यज्ञ करने का संदेश दिया।
इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मा आचार्य संजीव रूप ने बताया कि यज्ञ के समय पड़ने वाले मंत्रों का अपने जीवन में अनुष्ठान व अनुशीलन करने से ही जीवन में निखार आता है। ‘मानव जीवन में संस्कारों का महत्व’ विषय पर बोलते हुए आचार्य ने कहा कि एक पत्थर का संस्कार होकर जब मूर्ति बनती है तो उसकी कीमत बढ़ जाती है ठीक उसी प्रकार संस्कार होने हमारा महत्व बढ़ जाता है। घर में यज्ञ के संस्कार रहने से उससे निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा पूरे परिवार को सकारात्मक भावना से भर देती है जिससे संस्कारवान संतति का निर्माण होता है और आपसी मतभेद मिटते हैं इसलिए हमें अपना जीवन यज्ञीय बनाना चाहिए।
कहा कि ईश्वर उपासना से मिथ्या ज्ञान समाप्त होता है जिससे सर्वत्र निर्भयता प्राप्त होती है। जिस प्रकार नदी का लक्ष्य सागर है उसी प्रकार इस जीवात्मा लक्ष्य परमात्मा है इसलिए आत्मा को लक्ष्य तक पहुॅचाने के लिए संसार का त्यागपूर्वक करना चाहिए। वह हमें हर बुरे कार्य के समय भय, शंका, लज्जा आदि के द्वारा रोकता है और हर अच्छे कार्य में उत्साह, प्रसन्नता आरोग्यता आदि से युक्त कर पूरा सहयोग करता है। उसके इस सहारे को हमें समझना चाहिए। मध्यकालीन सत्र में दिनेश आर्य मुख्य प्रशिक्षक आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश ने आर्य वीर वीरांगनाओं को दिनांक 5 नवम्बर को दिन में 3 बजे होने वाले प्रदर्शन का पूर्वाभ्यास कराया और अभिभावकों से अपने बच्चों को आर्य वीर वीरांगना बनाने का संदेश दिया। सायंकालीन कार्यक्रम में वेद कथा से पूर्व पं0 दिनेश आर्य व पं0 मुकेश आर्य ने मधुर भजनों के माध्यम से लोगों को वैदिक संस्कारों को अपनाने का संदेश दिया। ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने बताया कि आर्य समाज सदैव से लोगों अंधविश्वास और ढोंग पाखण्ड से दूर करता आ रहा है समाज में शुचिता व भाईचारा का विकास करना इसका मुख्य उद्देश्य है।
इस अवसर पर ओंकार आर्य, अलख निरंजन आर्य, आनन्द स्वरूप आर्य, रजनी आर्य, कंचनलता आर्य, अर्चना आर्य, रश्मि आर्य, चन्द्रप्रकाश चैधरी, बी पी आनन्द, शिवपूजन आर्य, रवीन्द्र मौर्य, कन्हैया प्रसाद शुक्ल, अरूण कुमार, श्रीमन्नारायण, विश्वनाथ, नवीन कुमार श्रीवास्तव, योगेश शुक्ल, प्रिंस बरनवाल, विकास बरनवाल, नवल किशोर, चुनमुनलाल, आशुतोष, रामचन्दर, सुरेन्द्र शर्मा, धर्मज्ञ नाथ मिश्र, धीरेन्द्र नाथ मिश्र, वशिष्ठ गोयल, उपेन्द्र शर्मा, किसनाराम सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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