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अक्षय तृतीया युग परिवर्तन का ऐतिहासिक दिन है-राजेन्द्र पाण्डेय

आलोक कुमार श्रीवास्तव
विचारपरक संवाददाता
सिद्धार्थनगर 28 अप्रैल, भारतीय जनमानस में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इस दिन को आखा तीज भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु के 6वें अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
आज यहां यह जानकारी देते हुए धार्मिक सूत्रों ने बताया है कि आज के दिन भगवान श्री परशुराम की जयन्ती धूमधाम से मनायी जाती है। एक प्रश्न का उत्तर देते हुए इस सम्बन्ध में धार्मिक पुरोहित बस्ती जिले के कोपवा ग्राम निवासी राजेन्द्र पाण्डेय ने ‘‘विचारपरक’’ से बातचीत में बताया है कि सनातन धर्म और जैन धर्म के अनुयायी बैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को पड़ने वाली अक्षय तृतीया या आखा तीज को बड़ी धूमधाम से मनाते है। इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार के रूप में भगवान परशुराम जी का जन्म हुआ था गणेश जी ने भगवान व्यास के साथ इसी दिन से महाभारत लिखना शुरू किया था। इस दिन को सोने का आभूषण खरीदने के लिए सबसे पवित्र माना जाता है, पर उधार लेकर नही। इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है अर्थात जिसे कोई मुहूर्त नही मिल रहा उसे इस दिन कार्य कर लेना चाहिए इसे चिरंजीवी तिथि भी कहा जाता है।
इस दिन व्रत करने का विधान है, जिसके कारण गरीबी का नाश होता है और लक्ष्मी जी अपने सभी रूपो में आकर व्रती को पूरा आर्शीवाद प्रदान करती है। इस व्रत से जुड़ी एक कथा है- प्राचीन काल में एक गरीब, लेकिन चरित्रवान वैश्य रहता था।
उन्होंने बताया है कि दैनिक जरतो को पूरा करने में उसे बड़ी कठिनाई होती थी। जब कभी असफल रहता,तब भगवान से गुहार लगाता, प्रभु मुझे किन पापो का फल दे रहे हो। एक ब्रहाम्ण ने उसे गरीबी को दूर करने का अक्षय तृतीया व्रत करने का सुझाव दिया।
वैश्य द्वारा पूर्ण विधि -विधान से पूजा करने और दान करने से प्रभु प्रसन्न हुए व्यापार चल निकला उसने प्राण किया कि वह हर अक्षय तृतीया को खूब दान करेगा और पुण्य अर्जित करेगा। अक्षय तृतीया का व्रत करने की वजह से अगले जन्म में प्रभु कृपा से वह कुशावती राज्य का राजा बन गया इस जीवन में वह इतना धनी था और प्रजापालक था कि त्रिदेव-ब्रम्हा, विष्णु और शंकर ने अक्षय तृतीया के दिन ब्राहम्ण का रूप धर उसकी परीक्षा ली। राजा खरा उतरा और अगले जन्म में चन्द्रगुप्त बना अक्षय तृतीया उस दिन विशेष फल प्रदान करने वाली बन जाती है, जिस दिन सोमवार या रोहिणी नक्षत्र हो कहा जाता है कि इस दिन भगवान नर और नारायण, परशुराम जी और हयग्रीव का अवतार हुआ था। सृष्टिकर्ता ब्रहम्हा जी के पुत्र अक्षय कुमार का जन्म भी इसी दिन हुआ था अक्षय तृतीया के दिन ही द्वापर युग समापन हुआ था और त्रेता युग का आरंभ इसीलिए इसे युगादि तिथि भी कहा जाता है इसी दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते है साथ ही वृंदावन में बाकेबिहारी के चरणो के दर्शन भी केवल इसी दिन होते है मान्यता है कि महाभारत की लड़ाई भी इसी दिन होते है मान्यता है कि इसी दिन महाभारत की लडाई खत्म हुई थी।
उन्होंने बताया है कि महाराज युधिष्ठिर ने जब इस पर्व के विषय में पूछा तो भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था कि अक्षय तृतीया के दिन गंगा नदी में किया गया स्नान, जप-तप यज्ञ, दान आदि कर्म करने का पुण्य अक्षय होता है। इस पर्व को उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड,झारखंड,छत्तीसगढ़,बिहार,उडीसा,बंगाल,मध्यप्रदेश,राजस्थान,महाराष्ट्र, गुजरात,मंे बडे धूमधाम से मनाया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन उन कुवारो का विवाह भी हो सकता है जिन्हे ग्रह-गोचर खराब होने के नाते विवाह के लिए इंतजार करने को कहा जाता है।
श्री पाण्डेय ने बताया है कि ऐसा माना जाता है कि इस दिन बिना लग्न और मुहूर्त के होने वाला विवाह अक्षय अर्थात बहुत लंबा चलता है नई कार, संम्पत्ति आदि खरीदना बहुत शुभ माना जाता है गृहप्रवेश करने के लिए भी आज का दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

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अनुराग श्रीवास्तव विचारपरक के पत्रकार है |

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